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दशवीं लोकसभा में जनता पार्टी के तत्कालीन सांसद और राजस्थान के लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती के कुलपति एवं स्वतंत्रता सेनानी रहे 90 वर्षीय पद्मश्री प्रोफ़ेसर (डॉ.) रामजी सिंह किसी परिचय के मोहताज नहीं | वाराणसी में गांधियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ स्टडीज़ के निदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके प्रो. सिंह के प्रयासों की बदौलत समस्त भारत में पोस्ट ग्रेजुएट स्टडीज एवं रिसर्च के नाम से अलग विभाग की शुरुआत हुई और डॉ. सिंह का यह कदम शिक्षा जगत के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ |

बिहार के भागलपुर विश्विधालय में फिलॉसफी के प्रोफ़ेसर रहे प्रो. रामजी सिंह को बाद के वर्षों में इसी यूनिवर्सिटी ने गांधियन थॉट के विभागाध्यक्ष के रूप में जिम्मेवारी सौपी और उनके कामों और विचारों की बदौलत उनकी ख्याति हिन्दुस्तान की सीमा पार गयी | जानकार बताते है की गाँधी के विचारों को देश और दुनिया तक पहुंचाने के कारण डॉ. रामजी सिंह की पूरी दुनिया में न केवल एक अलग पहचान मिली बल्कि जय प्रकाश नारायण और आचार्य विनोबा भावे के साथ जुड़कर डॉ. सिंह ने समाज सेवा का एक उत्कृस्ट उदाहरण पेश किया और सर्वोदय , भूदान और ग्रामदान जैसे सामाजिक सुधार आंदोलनों के ज़रिए लोगों के दिलों पर छा गए |